KORBA सरपंच उपचुनाव : सलिहाभांठा में ‘भांजाबहु vs भतीजा’ का मुकाबला, अनुभव जीतेगा या नवाचारी सोच?
पहली बार मुख्य ग्राम सलिहाभांठा से कोई प्रत्याशी नहीं

कोरबा। त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव के तहत करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत सलिहाभांठा में सरपंच पद के लिए सोमवार 1 जून को मतदान होगा। पिछले एक वर्ष से रिक्त पड़े इस पद के लिए होने वाला चुनाव इस बार कई मायनों में बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। न केवल पंचायत बल्कि पूरे जनपद क्षेत्र की नजरें इस मुकाबले पर टिकी हुई हैं।
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मैदान में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के परिवार के दो सदस्य आमने-सामने हैं। एक ओर उनकी भांजाबहु प्रभा देवी रामप्रसाद कंवर हैं, तो दूसरी ओर उनके सगे भतीजे विजय कंवर चुनावी रण में उतरे हैं। ऐसे में यह मुकाबला अब “अनुभव बनाम नई सोच” के रूप में देखा जा रहा है।

दो कार्यकाल बाद बदली थी पंचायत की सत्ता
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत सलिहाभांठा पूर्व सांसद स्वर्गीय डॉ. बंशीलाल महतो तथा पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर का गृह पंचायत क्षेत्र है। फरवरी-मार्च 2025 में हुए पंचायत चुनाव से पहले लगातार दो कार्यकाल तक पंचायत की सत्ता ननकीराम कंवर के भांजा परिवार के पास रही थी। पहले रामप्रसाद कंवर और बाद में उनकी पत्नी प्रभा देवी कंवर ने सरपंच पद संभाला।

दोनों कार्यकालों में पंचायत के विकास के लिए कई कार्य किए गए, हालांकि कुछ बुनियादी जरूरतें और विकास कार्य अधूरे भी रह गए थे। बदलाव की लहर के बीच 2025 के पंचायत चुनाव में युवा प्रत्याशी नवरंगलाल कंवर को मतदाताओं ने मौका दिया और वे सरपंच निर्वाचित हुए।
लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। चुनाव जीतने के मात्र तीन महीने बाद ही नवरंगलाल कंवर का आकस्मिक निधन हो गया। इस घटना से पूरा पंचायत क्षेत्र स्तब्ध रह गया और विकास के कई सपने अधूरे रह गए। स्थिति को संभालने और पंचायत कार्य प्रभावित न हों, इस उद्देश्य से पंचों ने सर्वसम्मति से रामप्रसाद कंवर को कार्यवाहक सरपंच की जिम्मेदारी सौंपी, जो उपचुनाव तक पद संभालते रहे।

अब सीधी टक्कर : भांजाबहु बनाम भतीजा
अब 1 जून को होने जा रहे उपचुनाव में फिर से प्रभा देवी रामप्रसाद कंवर मैदान में हैं। हालांकि इस बार उनका मुकाबला परिवार के ही सदस्य विजय कंवर से है, जो पंचायत के सर्वांगीण विकास और नई कार्यशैली के वादों के साथ जनता के बीच पहुंचे हैं। गांव में यह चुनाव अब केवल सरपंच का नहीं, बल्कि अनुभव और नई सोच के बीच मुकाबले के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पहली बार मुख्य ग्राम सलिहाभांठा से कोई प्रत्याशी नहीं
इस चुनाव की एक और खास बात यह है कि पंचायत के मुख्य ग्राम सलिहाभांठा, जहां लगभग 60 प्रतिशत मतदाता निवास करते हैं, वहां से इस बार एक भी प्रत्याशी मैदान में नहीं है।पंचायतवासियों की इच्छा थी कि चुनाव सर्वसम्मति से हो जाए, लेकिन आश्रित ग्राम बंधवाभांठा में सहमति नहीं बन पाने के कारण चुनावी स्थिति निर्मित हो गई।
1456 मतदाता करेंगे फैसला
सरपंच पद के लिए 1 जून को सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक मतदान होगा। पंचायत के दोनों गांवों में मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
इस चुनाव में कुल 1456 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 745 पुरुष और 711 महिला मतदाता शामिल हैं। कुल मतदाताओं में लगभग 60 प्रतिशत मतदाता मुख्य ग्राम सलिहाभांठा के हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सलिहाभांठा के मतदाता ही जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता अनुभव पर भरोसा जताते हैं या फिर पंचायत की कमान एक नए चेहरे और नई सोच को सौंपते हैं।









